उत्तराखंड अपने जल जंगल और जमीन को बचाने के लिए बना था लेकिन इस पंचर डबल इंजन की सरकार @GovtUttarakhand @ukcmo में हमारा जल बिक चुका, हमारी जमीन बिक चुकी और अब हमारा जंगल बेचने की तैयारी चल रही है और इसमें सरकारी अधिकारी भी शामिल है। यह है आज तक @aajtak की खबर जिसे वरिष्ठ पत्रकार @ankitsharmauk अंकित शर्मा जी ने लिखा है उन्होंने बताया है कि अब जंगलों में भी चोरी हो रही है वो भी वन विभाग के संरक्षण में, और चोरी भी एक दो बाउंड्री पिलर कि नहीं 7375 बाउंड्री पिलर्स की। क्या अब सरकारी विभाग यह मान चुका है की सरकार ने सब जंगल पूंजीवादियों को बेच दिया है और आम जनता का इस पर कोई अधिकार नहीं? क्या ये बाउंड्री पिलर सिर्फ आम आदमी को दूर रखने के लिए लगाए जाते हैं? इस चोरी का जिम्मेदार कौन और क्या सजा मिलेगी! मुख्यमंत्री @pushkardhami साहब से सवाल उम्मीद है इसका जवाब मुख्यमंत्री साहब जरूर देंगे