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पूंजीपति => प्राकृतिक संसाधन+मजदूर की मेहनत

पूंजीपति को अमीर बनने के लिए दो चीज चाहिए प्राकृतिक संसाधन और मजदूर की मेहनत। प्राकृतिक संसाधन जनता के हैं और मजदूर की मेहनत का मालिक वह खुद है। जब तक सरकार सेना और बंदूक की मदद से किसी भ्रष्ट और क्रूर व्यक्ति की मदद नहीं करती तब तक वह व्यक्ति न जनता के संसाधनों का मालिक बन सकता है और ना मजदूर के श्रम का । अंबानी अडानी बिना सरकारी बंदूकों और सेना की मदद के अमीर बन के दिखाएं तो हम मान जाएं।सारी दुनिया में युद्ध पूंजीपतियों के लिए होते हैं। सेनायें पूंजीपतियों के लिए होती है गरीबों को किसी सेना की जरूरत नहीं है।सेनाओं का काम ही गरीबों की जमीन और उसकी मेहनत का फल छीनने में पूंजीपति की मदद करने का है ၊ जब आदिवासी अपनी जमीन छीनने का विरोध करता है तब उसको सरकारी सेना जाकर मारती है और जब मजदूर अपनी मजदूरी बढ़ाने की मांग करता है तब जाकर उसको सरकारी सेना मारती है। यह सारी दुनिया में होता है भारत में भी आजकल यही चल रहा है। आजकल पूंजीपतियों का सबसे बड़ा नौकर अमित शाह बना हुआ है ၊ जब हमारे सैनिक आदिवासियों की हत्या करते हैं तो दिल्ली में बैठा बैठा अमित शाह बयान देता है कि हमने नक्सलवादियों को मार दिया है और हम 31 मार्च से पहले भारत को आतंकवाद से मुक्त कर देंगे। शहरों में रहने वाली हमारी जनता को क्योंकि आदिवासियों से छीन कर उसके आधार पर चलाये जाने वाले खनिज और उद्योगों में नौकरी करनी है इसलिए शहरी जनता ताली बजा देता है। उधर मांओं के बेटे मार डाले जाते हैं बच्चों के पिता मार डाले जाते हैं पत्नी का पति मार दिया जाता है ၊ अभी पिछले ही महीने हमारे सुरक्षा बलों ने आदिवासियों की हत्या करके उनके लिंग काट दिए।लिंग इसलिए काटे ताकि हमारी सरकार आदिवासियों को बता सके कि हम तुम्हारी मर्दानगी को इस तरह चाकू के दम पर काट कर फेंक देंगे ၊ दुनिया में बहुत सारे आदिवासियों का समूल नाश कर दिया गया।भारत में यह आज हो रहा है लेकिन खुश मत रहो अगला नंबर आपका है ၊ वीडियो में देखिए सोनी सोरी उन महिलाओं के साथ खड़ी है जिनके परिवार के सदस्यों की हत्या की गई है। – हिमांशु कुमार